CG News: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर साय सरकार सख्त, फीस-किताब और यूनिफॉर्म के लिए जारी किए नए नियम

Chhattisgarh Private School Rules:नया शिक्षा सत्र (Academic Session) शुरू होते ही छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के अभिभावकों की सबसे बड़ी परेशानी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस और महंगी किताबें बन जाती हैं। हर साल प्राइवेट स्कूल (Private Schools) प्रबंधन द्वारा सिलेबस बदल देना और किसी खास दुकान से ही यूनिफॉर्म तथा किताबें खरीदने का दबाव बनाना एक आम बात हो गई है। लेकिन इस बार राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा माफियाओं और प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) ने सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सभी निजी स्कूलों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। आइए जानते हैं कि इस बार नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों पर कौन से नए नियम लागू किए गए हैं।
किसी खास दुकान से सामग्री खरीदने की बाध्यता खत्म
अक्सर देखा गया है कि स्कूल प्रबंधन और कुछ चुनिंदा दुकानदारों के बीच मोटा कमीशन सेट होता है। इसी वजह से पैरेंट्स को एक ही दुकान से पूरा सेट खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
- नए नियम के तहत, अब कोई भी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान (Specific Shop) से किताबें, कॉपियां, स्टेशनरी या स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
- स्कूल प्रबंधन को किताबों और यूनिफॉर्म की सूची अपनी वेबसाइट पर 45 दिन पहले ही सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक अपनी सुविधानुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकें।
- स्कूलों को हर साल यूनिफॉर्म बदलने की अनुमति नहीं होगी। कम से कम 5 साल तक एक ही यूनिफॉर्म लागू रहेगी।
एनसीईआरटी (NCERT) और पुरानी किताबों पर जोर
महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों की जगह मानक और सस्ती किताबों को बढ़ावा देने के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
- स्कूलों को अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी (NCERT), एससीईआरटी (SCERT) और सीबीएसई (CBSE) द्वारा मान्यता प्राप्त किताबों से ही पढ़ाई करवानी होगी।
- महंगी रेफरेंस और पूरक किताबों (Reference Books) को खरीदने का दबाव नहीं डाला जाएगा; इसके बजाय स्कूलों को इनकी पीडीएफ (PDF) कॉपी अभिभावकों को उपलब्ध करानी होगी।
- पुरानी किताबों और फोटोकॉपी के उपयोग की पूरी अनुमति होगी। कोई भी स्कूल पुरानी किताब इस्तेमाल करने वाले छात्र को परेशान नहीं कर सकता।
- हर स्कूल की लाइब्रेरी में प्रत्येक कक्षा की कम से कम 5 सेट किताबें मौजूद रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियम तोड़ा तो दर्ज होगी एफआईआर, मान्यता होगी रद्द
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर अब केवल नोटिस की कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि सीधा एक्शन लिया जाएगा।
- यदि कोई भी निजी स्कूल इन निर्देशों की अनदेखी करता है या तय मानकों से ज्यादा (बिना फीस निर्धारण समिति की मंजूरी के) फीस बढ़ाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- जिला प्रशासन को अधिकार दिए गए हैं कि बार-बार नियम तोड़ने वाले स्कूलों के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए।
- अंतिम कार्रवाई के रूप में संबंधित स्कूल की मान्यता (Recognition) तक रद्द की जा सकती है।
अभिभावक अब स्कूलों की किसी भी प्रकार की मनमानी की शिकायत सीधे जिला शिक्षा अधिकारी या हेल्पलाइन ईमेल पर कर सकते हैं।



