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Gold Import Rules 2026: सरकार का बड़ा फैसला, अब केवल ये 15 बैंक ही विदेशों से मंगा सकेंगे सोना-चांदी

भारत में सोने और चांदी की मांग हमेशा से ही बहुत अधिक रही है। खासकर त्योहारों और शादियों के सीजन में यह मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। देश की इस भारी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हर साल बड़े पैमाने पर विदेशों से सोना और चांदी आयात किया जाता है। लेकिन अब, भारत सरकार और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने बुलियन मार्केट में बड़ा बदलाव करते हुए एक बेहद अहम फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब देश में कोई भी निजी एजेंसी या संस्थान अपनी मर्जी से सोने-चांदी का आयात नहीं कर सकेगा। सरकार ने इसके लिए केवल 15 बैंकों को अधिकृत किया है।

क्यों लिया गया यह बड़ा और सख्त फैसला?

दरअसल, सोने का भारी आयात सीधे तौर पर भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार पर गहरा असर डालता है।

  • पहले कई अलग-अलग एजेंसियां और बैंक इस आयात प्रक्रिया में शामिल थे, जिससे बाजार में निगरानी रखना थोड़ा मुश्किल हो रहा था।
  • सरकार चाहती है कि सोने का आयात केवल वही प्रतिष्ठित संस्थान करें जो रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस का पूरी सख्ती से पालन करते हों।
  • इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बुलियन मार्केट (Bullion Market) में पूरी तरह से पारदर्शिता लाना, विदेशी मुद्रा का सही प्रबंधन करना और देश में सोने की तस्करी (Smuggling) पर पूरी तरह से लगाम लगाना है।

किन 15 बैंकों को मिली है आयात की मंजूरी?

इसके अलावा, सरकार ने जिन संस्थानों को आयात की जिम्मेदारी सौंपी है, वे देश के सबसे भरोसेमंद नाम हैं।

  • सरकार ने वर्ष 2026 से 29 तक की अवधि के लिए एक विशेष सूची जारी की है।
  • इस सूची में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।
  • इनके साथ ही इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक को भी इस लिस्ट में जगह दी गई है।
  • अब ये 15 बैंक ही देश भर के ज्वेलर्स और अन्य अधिकृत संस्थाओं के लिए विदेशों से सोने और चांदी के बार या बिस्कुट मंगवा सकेंगे।

आम जनता और ज्वेलर्स पर क्या होगा असर?

हालांकि, इस नए नियम से बाजार के समीकरणों में थोड़ा बदलाव जरूर आएगा।

  • ज्वेलर्स के लिए अब विदेशों से सीधे सोना मंगाने के विकल्प सीमित हो गए हैं। उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पूरी तरह से इन्हीं 15 बैंकों पर निर्भर रहना होगा।
  • वहीं आम जनता के नजरिए से देखा जाए, तो यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है।
  • चूंकि अब सारा सोना केवल प्रमुख और अधिकृत बैंकों के माध्यम से ही बाजार में आएगा, इसलिए आम ग्राहकों को मिलने वाले सोने की शुद्धता और उसकी सोर्सिंग पहले से कहीं अधिक भरोसेमंद हो जाएगी।

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