Bastar Naxal Operation: अबूझमाड़ के ‘अबूझ’ रहस्य बेनकाब, सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किए नक्सलियों के सीक्रेट अंडरग्राउंड ठिकाने

कभी देश के सबसे दुर्गम और रहस्यमयी इलाकों में गिना जाने वाला अबूझमाड़ अब अपने भीतर छिपे नक्सली नेटवर्क के गहरे राज उगल रहा है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब घने जंगलों के बीच बने गोरिल्ला युद्ध के ठिकाने, अंडरग्राउंड हाउस और हथियारों के बड़े डंप एक के बाद एक सामने आ रहे हैं।
नारायणपुर में अंडरग्राउंड ठिकाना ध्वस्त
ताजा कार्रवाई नारायणपुर जिले के काकुर थाना अंतर्गत सोनपुर क्षेत्र में की गई है। Bastar Naxal Operation के तहत सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा तैयार किए गए एक सीक्रेट अंडरग्राउंड ठिकाने (भूमिगत घर) का पता लगाकर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
इस ठिकाने से जुड़ी अहम बातें:
- बनावट: काकुर क्षेत्र के घने जंगलों में बने इस अंडरग्राउंड हाउस को इस तरह डिजाइन किया गया था कि ऊपर से देखने पर यह बिल्कुल सामान्य जमीन जैसा दिखता था।
- उपयोग: प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नक्सली इस जगह का इस्तेमाल छिपने, खुफिया बैठकें करने, रणनीति बनाने और अपनी दैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए करते थे।
- सघन सर्चिंग अभियान के दौरान जब जवानों ने इस संदिग्ध जगह की गहराई से जांच की, तब इस भूमिगत संरचना का खुलासा हुआ, जिसे तत्काल नष्ट कर दिया गया।
उजागर हो रहीं ‘गुरिल्ला युद्ध’ की तकनीकें
विशेषज्ञों के अनुसार, अबूझमाड़ का यह इलाका नक्सलियों के लिए लंबे समय तक 1 सुरक्षित पनाहगाह रहा है। यहां उन्होंने गुरिल्ला युद्ध की कई उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया:
- ठिकाने पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में छिपे होते थे और जमीन के नीचे सुरंगनुमा संरचनाएं बनाई जाती थीं।
- आसपास की निगरानी के लिए हमेशा ऊंचे स्थानों का चयन किया जाता था।
- आपात स्थिति में भागने के लिए वैकल्पिक रास्ते (Escape Routes) भी तैयार रखे जाते थे।
हथियारों और विस्फोटकों के ‘डंप’ की खोज तेज
अभियान के दौरान सुरक्षा बलों का ध्यान सिर्फ ठिकानों को ध्वस्त करने तक सीमित नहीं है। जंगलों में नक्सलियों द्वारा वर्षों से छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और IED (आईईडी) डंप को भी खोजकर निष्क्रिय किया जा रहा है।
अबूझमाड़ के कई दुर्गम स्थानों पर बड़े पैमाने पर दफन किए गए हथियार अब बाहर निकाले जा रहे हैं। नारायणपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह नक्सल उन्मूलन अभियान आगे भी जारी रहेगा और जंगलों में छिपे हर संभावित खतरे को खत्म करने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।



