
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव (US-Iran Tension) और सैन्य अभियानों के बीच एक बेहद ही हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। युद्ध जैसे इन कठिन हालातों में अमेरिकी सैनिकों के खान-पान और कैफीन खपत से जुड़े कुछ ऐसे आंकड़े जारी हुए हैं, जो किसी को भी चौंका सकते हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक हालिया ब्रीफिंग के दौरान खुलासा हुआ है कि इस लंबी और तनावपूर्ण तैनाती के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने अपनी नींद भगाने और मोर्चे पर मुस्तैद रहने के लिए लाखों गैलन कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन कर डाला।
पेंटागन ब्रीफिंग: 9.5 लाख गैलन कॉफी और 20 लाख एनर्जी ड्रिंक
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने इस सैन्य अभियान की लॉजिस्टिक और खपत रिपोर्ट साझा की। उन्होंने बताया कि लंबे और थका देने वाले ऑपरेशनों के दौरान सैनिकों को हर वक्त अलर्ट (सतर्क) रहना पड़ता है, जिसके लिए कैफीन का भारी मात्रा में सहारा लिया गया।
सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार:
- सैनिकों ने इस पूरी अवधि के दौरान लगभग 9.5 लाख गैलन कॉफी पी ली।
- इसके अलावा, अपनी शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करने के लिए करीब 20 लाख (2 मिलियन) एनर्जी ड्रिंक्स का भी सेवन किया गया।
- भोजन आपूर्ति की बात करें तो अभियान के दौरान सैनिकों को लगभग 60 लाख (6 मिलियन) भोजन (Meals) उपलब्ध कराए गए।
ये विशाल आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि युद्ध या गंभीर तनाव की स्थिति में सेना के लिए रसद और लॉजिस्टिक्स (Logistics) की भूमिका कितनी बड़ी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किए गए आंकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की इस अहम ब्रीफिंग के दौरान जनरल कैन ने इन भारी-भरकम खपत के आंकड़ों को थोड़े हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों के चेहरों पर भी हल्की मुस्कान आ गई। हालांकि, उन्होंने तुरंत यह स्पष्ट किया कि यह पूरा मिशन बेहद ही विषम और कठिन परिस्थितियों में संचालित किया जा रहा था, जहां सैनिकों की एकाग्रता टूटना भारी पड़ सकता था।
वर्तमान स्थिति: संघर्ष पर विराम, लेकिन सेना मुस्तैद
US-Iran Tension के ताजा हालातों की बात करें तो, हाल ही में दोनों देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच चल रहे संघर्ष पर कुछ समय के लिए विराम लगा है।
हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुई है। अमेरिकी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि मध्य पूर्व (Middle East) के इस संवेदनशील क्षेत्र में उनके सैनिक अभी भी पूरी तरह से तैनात हैं, क्योंकि हालात किसी भी वक्त दोबारा करवट ले सकते हैं।



