छत्तीसगढ़ में 300 नेताओं की सुरक्षा होगी कम: VIP Security Cut का प्लान, बस्तर में 1 साल तक डटे रहेंगे 60,000 जवान

छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत के सरकार के दावों के बीच सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी गई है। दरअसल, अब राज्य के करीब 300 नेताओं को मिली अतिरिक्त सुरक्षा में अस्थायी रूप से भारी कटौती (VIP Security Cut) करने की तैयारी चल रही है। हालांकि, आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल बस्तर से किसी भी तरह की फोर्स को वापस नहीं बुलाया जाएगा।
VIP Security Cut: वीआईपी ड्यूटी से हटेंगे 1,200 जवान
वर्तमान स्थिति के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल नेताओं की वीआईपी ड्यूटी (VIP Duty) में तैनात हैं। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1,200 जवान सिर्फ नेताओं के सुरक्षा घेरे में लगे हुए हैं। सुरक्षा समीक्षा समिति (प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप) की सिफारिशों के बाद अब इन अतिरिक्त जवानों को वापस मुख्य मोर्चे पर लाया जा सकता है।
वर्तमान में प्रदेश के सुरक्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- 13 अतिविशिष्ट व्यक्तियों (मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष आदि) को Z+ (जेड प्लस) सुरक्षा प्राप्त है।
- 38 नेताओं को Z (जेड) श्रेणी की मजबूत सुरक्षा दी गई है।
- 35 लोगों को Y+ (वाय प्लस) और 121 नेताओं को X (एक्स) श्रेणी का कवर मिला हुआ है।
बस्तर में 1 साल तक तैनात रहेंगे 60,000 जवान
नेताओं की सुरक्षा में भले ही कमी की जा रही हो, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में सरकार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि एहतियात के तौर पर अगले 1 साल तक बस्तर में आर्म्ड फोर्स (Armed Forces) पूरी तरह से तैनात रहेगी।
इसके अलावा, यह अहम कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसी बड़े ऑपरेशन के बाद इलाके को पूरी तरह सुरक्षित (Secure) किया जा सके। वर्तमान में बस्तर संभाग में करीब 60,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें से 40,000 जवान केंद्रीय बलों के हैं। परिणाम स्वरूप, जब तक पूरे इलाके में स्थिति 100 प्रतिशत सामान्य नहीं हो जाती, तब तक फोर्स वहां डटी रहेगी।
विपक्ष ने दावों पर उठाए गंभीर सवाल
सुरक्षा बलों की इस नई रणनीति के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी काफी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब सरकार नक्सलवाद के पूरी तरह खत्म होने का दावा कर रही है, तो फिर बस्तर में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य संसाधनों का संतुलित और बेहतर उपयोग करना है। जब वीआईपी ड्यूटी से जवान मुक्त होंगे, तो उनका इस्तेमाल आम जनता की सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण अभियानों में किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।



