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TB Mukt Bharat: जशपुर में ‘निक्षय मित्र’ ने बदली 60 मरीजों की जिंदगी, विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के लिए बने संजीवनी

TB Mukt Bharat: टीबी (Tuberculosis) महज एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी एक गंभीर चुनौती है। हर साल यह बीमारी हजारों परिवारों को भारी आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तो उसके सामने सिर्फ दवा खाने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी कई मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PM TB Mukt Bharat Abhiyaan) में ‘निक्षय मित्र’ (Ni-kshay Mitra) की अवधारणा को शुरू किया गया था। आज इसी पहल की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से सामने आई है।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)

  • पोषण है जरूरी: टीबी के इलाज में दवा के साथ-साथ पर्याप्त पोषण भी अनिवार्य है।
  • जशपुर की प्रेरणा: जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता बने 60 टीबी मरीजों के ‘निक्षय मित्र’।
  • PVTG समुदाय को मदद: गोद लिए गए मरीजों में 19 विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) से थे।
  • राज्य स्तरीय सम्मान: निस्वार्थ सेवा के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पोषण की कमी से बीच में छूट जाता है इलाज

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के सफल उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही जरूरी है पर्याप्त पोषण आहार। लेकिन दूरस्थ इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पौष्टिक भोजन जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कुपोषण और टीबी एक दुष्चक्र की तरह हैं—कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। यही कारण है कि कई मरीज बीच में ही अपना इलाज छोड़ देते हैं। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों का मनोबल भी बढ़ाते हैं।

जशपुर में निरंजन गुप्ता ने पेश की मिसाल

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवास करने वाली विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG – पहाड़ी कोरवा और बिरहोर) के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हमेशा से सीमित रही है। यहां टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और पूरा उपचार सुनिश्चित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

इन परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से एक निक्षय मित्र के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

  • उन्होंने न केवल 19 पीवीटीजी समुदाय के टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार (Nutrition Kits) और आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

सिर्फ किट नहीं, घर-घर जाकर किया जागरूक

निरंजन गुप्ता की यह पहल केवल पोषण किट बांटने तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर जाकर मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद किया। उन्होंने टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव और उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। इस लगातार संवाद का नतीजा यह हुआ कि जनजातीय समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग खुद अस्पतालों तक पहुंचने लगे।

राज्य स्तरीय ‘निक्षय मित्र’ पुरस्कार से सम्मानित

टीबी मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में निक्षय मित्र की भूमिका बेहद अहम होती है। निरंजन गुप्ता के इन्हीं उल्लेखनीय प्रयासों को देखते हुए उन्हें दिसंबर 2024 में ‘राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

निष्कर्ष: टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का दायित्व है। जशपुर की यह पहल बताती है कि यदि एक व्यक्ति भी संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज जरूरत है कि ज्यादा से ज्यादा आम नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस महा-अभियान से जुड़ें।

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