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Chhattisgarh Migrant Workers: कुलगाम हमले के बाद उठे सवाल, 7 महीने में 58 हजार मजदूरों का पलायन

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हाल ही में आतंकियों की गोली का शिकार हुए छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों (Chhattisgarh Migrant Workers) की मौत ने राज्य में रोजगार और पलायन के मुद्दे पर गंभीर बहस छेड़ दी है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई उद्योग नीति में स्थानीय अकुशल श्रमिकों को 100 प्रतिशत प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत के आंकड़े इस दावे से काफी अलग नजर आते हैं। रोजगार और बेहतर मजदूरी की तलाश में हर साल राज्य के हजारों श्रमिक दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं।

7 महीने में 58 हजार से अधिक श्रमिकों का पलायन, Chhattisgarh Migrant Workers

श्रम विभाग की प्रवासी श्रमिक पंजीयन रिपोर्ट के आंकड़े पलायन की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई तक, केवल सात महीनों के भीतर 58,601 श्रमिकों ने प्रवासी श्रमिक श्रेणी में अपना सफल पंजीयन कराया है। दस्तावेजों के अभाव में 24,266 आवेदन वापस भी हुए हैं।

ये श्रमिक मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर जैसे 9 राज्यों में काम करने जा रहे हैं। ये लोग वहां निर्माण कार्यों, फैक्ट्री, ईंट-भट्ठा, कृषि और अन्य असंगठित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देते हैं। (Chhattisgarh Migrant Workers) बिलासपुर, मुंगेली और बलौदाबाजार जैसे जिलों से सबसे ज्यादा पलायन दर्ज किया गया है।

कुलगाम में आतंकियों का शिकार बने दो मजदूर

पलायन का यह दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने काम करने गए छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। यह हमला कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम इलाके में हुआ।

आतंकियों ने पहले दोनों युवकों से उनकी पहचान और नाम पूछा, फिर उन पर फायरिंग कर दी। मृतकों की पहचान सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना के रूप में हुई। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।

ज़रूरी बात…Chhattisgarh Migrant Workers

  • कुलगाम (जम्मू-कश्मीर) में आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की मौत हो गई।
  • जनवरी से जुलाई 2026 तक राज्य के 58,601 मजदूरों ने प्रवासी श्रमिक के रूप में पंजीयन कराया है।
  • पलायन करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बिलासपुर (10,099) और मुंगेली (7,029) जिले से है।
  • साल 2011 की जनगणना के आधार पर छत्तीसगढ़ से अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं।
  • राज्य की नई उद्योग नीति में स्थानीय अकुशल श्रमिकों को 100 प्रतिशत प्राथमिकता देने का नियम है।

क्या हैं पलायन के प्रमुख कारण?

स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार की कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा कृषि कार्य का मौसमी होना (विशेषकर खरीफ कटाई के बाद), महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना में मजदूरी दर का अधिक होना, और निर्माण व ईंट-भट्ठा क्षेत्रों में लगातार श्रमिकों की मांग होना भी अहम वजहें हैं। (Chhattisgarh Migrant Workers) गांव-आधारित ठेकेदार और रिश्तेदारी नेटवर्क के कारण यह पलायन हर साल दोहराया जाता है।

सरकार का पक्ष: उद्योगों से मिल रहा है रोजगार

रोजगार के इस मुद्दे पर संसद के उच्च सदन राज्यसभा में पहले भी आंकड़े पेश किए जा चुके हैं, जिनमें बताया गया था कि छत्तीसगढ़ से 10 लाख 21 हजार 77 लोगों का पलायन हुआ है, जो कि बिहार के 7 लाख 6 हजार श्रमिकों के आंकड़े से भी ज्यादा है।

हालांकि, राज्य के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि (Chhattisgarh Migrant Workers) बीते ढाई वर्षों में 3,009 छोटे-बड़े उद्योग और फैक्ट्रियां स्थापित हुई हैं, जिनमें 50,807 लोगों को रोजगार मिला है। उनका दावा है कि नई उद्योग नीति के नियमों के कारण अन्य राज्यों में काम करने जाने वाले श्रमिकों की संख्या में कमी आई है।

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