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US वीजा अब मुश्किल, 37 देशों पर लागू किए नए नियम

Amerika अमेरिका: 37 देशों के नागरिकों के लिए वीजा नियमों में कड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत बी1/बी2 बिजनेस और टूरिस्ट वीजा के लिए वीजा आवेदन करने वाले आवेदकों को भारी भरकम बॉन्ड जमा करना अनिवार्य होगा। यह कदम अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं और अवैध ओवरस्टे रोकने की नीति के तहत उठाया गया है। अमेरिका की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 21 जनवरी, 2026 से बांग्लादेश, अल्जीरिया, अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, बुरुंडी, काबो वर्डे, कोटे डी आइवर, क्यूबा, जिबूती, डोमिनिका, फिजी, गैबॉन, किर्गिस्तान, नेपाल, नाइजीरिया, सेनेगल, ताजिकिस्तान, टोगो, टोंगा, तुवालु, युगांडा, वानुअतु, वेनेजुएला और जिम्बाब्वे के आवेदकों पर यह नियम लागू होगा। इसके अतिरिक्त मलावी, जाम्बिया, मॉरिटानिया, साओ टोमे और प्रिंसिपे, तंजानिया और गाम्बिया में भी अलग-अलग तारीखों से नए नियम लागू होंगे।

बी1/बी2 वीजा के लिए मंजूर सभी नागरिकों को $5,000, $10,000 या $15,000 का बॉन्ड जमा करना होगा। अमेरिका के ढाका स्थित दूतावास ने स्पष्ट किया है कि यह राशि वीजा इंटरव्यू के समय तय की जाएगी और इसे जमा करने का नियम तभी लागू होगा जब वीजा अप्रूव हो। यदि आवेदक वीजा की शर्तों का पालन करता है तो यह रकम वापस कर दी जाएगी। अमेरिकी दूतावास ने आवेदकों को चेतावनी दी है कि इंटरव्यू से पहले कोई भी एडवांस भुगतान न करें। जल्दी पेमेंट करने से न तो वीजा मिलने की गारंटी मिलती है और न ही
फ्रॉड से सुरक्षा। कई थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स इस समय स्कैम कर रही हैं। किसी भी तरह का भुगतान, यदि इंटरव्यू से पहले किया गया है, रिफंडेबल नहीं होगा।

अमेरिका ने यह कदम उन देशों के लिए उठाया है, जहां सुरक्षा और ओवरस्टे की समस्याएं सामने आती रही हैं। इसके तहत आवेदकों को अमेरिकी वित्तीय विभाग के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पेयडॉटजीओवी पर बॉन्ड की शर्तों से सहमत होना होगा और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का फॉर्म I-352 जमा करना होगा। इस नई पॉलिसी से अमेरिका के वीजा आवेदकों के लिए प्रक्रिया जटिल और महंगी हो गई है। सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए अमेरिकी अधिकारी लगातार सलाह दे रहे हैं कि आवेदक नियमों का पालन करें और समय पर और सही तरीके से आवेदन जमा करें। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अवैध ओवरस्टे में कमी आएगी और अमेरिका में रहने वाले अप्रवासी नागरिकों के मामलों में कड़ाई आएगी। हालांकि, इस नियम से प्रभावित देशों के सामान्य नागरिकों के लिए यह भारी आर्थिक बोझ साबित हो सकता है।

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