CG High Court Relief: पत्रकार को एससी-एसटी एक्ट मामले में हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, निरस्त हुआ निचली अदालत का फैसला | High Court News

CG High Court Relief:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायपालिका और पत्रकारिता से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल, एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपों का सामना कर रहे पत्रकार मोहन निषाद को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद पत्रकार की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था। परिणामस्वरूप, यह फैसला उन मामलों में एक नज़ीर बन सकता है जहाँ बिना पुख्ता ट्रायल के आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखा जाता है।
ट्रायल में देरी को माना जमानत का मुख्य आधार
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की गहन सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कुछ अहम टिप्पणियां कीं।
- बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी पत्रकार 18 मार्च 2026 से ही न्यायिक हिरासत में है।
- न्यायालय ने पाया कि इस मामले के ट्रायल यानी मुक़दमे की सुनवाई पूरी होने में अभी काफी लंबा समय लग सकता है।
- इसके अलावा, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना न्यायोचित नहीं है।
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने परिस्थितियों और ट्रायल में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए मोहन निषाद को जमानत देने का अहम निर्णय लिया। कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला और आरोप?
यह पूरा विवाद पत्रकार मोहन निषाद पर लगे धमकी और अभद्र व्यवहार के आरोपों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने उन पर एससी-एसटी एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। दरअसल, गिरफ्तारी के बाद स्थानीय ट्रायल कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके परिणामस्वरूप, बचाव पक्ष ने न्याय की गुहार लगाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अब हाईकोर्ट से मिली इस जमानत के बाद पत्रकार जेल से बाहर आ सकेंगे, लेकिन मामले का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट की पूरी सुनवाई के बाद ही तय होगा। इसलिए, आगे भी इस केस की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।






