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साइबर सेल की आड़ में क्राइम ब्रांच के मामले को डीजीपी को गंभीरता ने लिया

रायपुर/जनदखल. प्रदेश में क्राइम ब्रांच भंग करने के बाद साइबर सेल की आड़ में इसे चलाने की सूचनाओं को डीजीपी डीएम अवस्थी ने गंभीरता से लिया है। साइबर क्राइम के नाम से वसूली की शिकायतों के बाद डीजीपी ने इन्हें अवैध करार दिया और कहा कि ये जिन मामलों की जांच करेंगे, वह भी गैरकानूनी होगी। डीजीपी ने चिट्‌ठी जारी करते हुए पुलिस अधीक्षकों को चेतावनी दी कि अगर अब उन्होंने कोई विंग गठित की तो ये आदेश की अवहेलना माना जाएगा।

डीजीपी दफ्तर को सूचना मिली थी कि कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने साइबर सेल के नाम पर क्राइम ब्रांच के समान ही विंग तैयार कर ली है। सूदखोरी से लेकर ऑन लाइन ठगी और लूट की वारदातों में तकनीकी जांच के साथ-साथ क्राइम ब्रांच की तरह टीम भेजकर पड़ताल करवायी जा रही है। सेल के माध्यम से वसूली की भी शिकायतें आने लगी हैं। सेल की टीम जुआ सट्‌टा और सेक्स रैकेट पर छापे मार रही है।

डीजीपी अवस्थी से इसकी शिकायत हुई थी। इसी आधार पर उन्हें साइबर सेल के नाम पर चल रहे क्राइम ब्रांच को अवैध करार दिया। उन्होंने क्राइम इन्वेस्टिगेशन के नाम पर किसी तरह की विंग या शाखा के गठन से भी मना कर दिया और कहा कि इससे ही पुलिस की छवि सुधरेगी। डीजीपी को शिकायत मिली थी कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और रायगढ़ सहित कुछ अन्य जिलों में सेल के नाम पर सीधे क्राइम ब्रांच की टीम को फील्ड में उतार दिया गया था। सेल में क्राइम ब्रांच के ही जवानों को रखकर टीम बना दी गई थी। टीम के माध्यम से जुआ-सट्‌टा पकड़ने के साथ कबाड़ पर भी छापे मारे जा रहे थे।

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