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साफ पानी के लिए फिल्टर प्लांट में क्लोरीन की मात्रा पर रखी जा रही है नजर

रायपुर/जनदखल. राजधानी के अलग-अलग वार्डों में पीने के पानी के लिए हर दिन क्लोरीन टेस्ट होगा। फिल्टर प्लांट से आ रहे पानी में क्लोरीन की सही मात्रा का पता लगाया जाएगा। बारिश के दिनों में नदी का पानी ज्यादा गंदा रहता है। इसलिए क्लोरिन की मात्रा बढ़ानी पड़ती है। इसकी ज्यादा मात्रा सेहत के लिए नुकसानदायक है और कम होने से पानी की गंदगी ठीक ढंग से साफ नहीं हो पाती।

मानसून शुरू हो गया है। प्रदेशभर में तेज बारिश हो रही है। रायपुर निगम को गंगरेल बांध से पानी मिलता है। गंगरेल मुख्य नगर से पानी रायपुर पहुंचता है। बारिश के दिनों में नाले-नालियों में पानी के साथ बहकर कई तरह के केमिकल भी आते हैं। इसलिए पानी ज्यादा गंदा रहता है। निगम के विशेषज्ञों के मुताबिक इसीलिए इस समय पानी को शुद्ध करने में ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। क्लोरिन की मात्रा भी इसीलिए बढ़ानी पड़ती है।

फिल्टर प्लांट में पानी फिल्टर होने के बाद टेस्ट किया जाता है और उसके बाद टंकियों में सप्लाई की जाती है। फिर भी पानी टंकियों से घरों में पहुंचने वाले पानी के क्लोरिन टेस्ट का नियम है। पानी में क्लोरीन टेस्ट का नियम है। हर जोन से एक दिन में न्यूनतम 10 सेंपल लिया जाना है। यह सेंपल जोन के अलग-अलग वार्डों से लिया जाना है। पूरे बारिश में निगम अमले को यह काम नियमित रूप से करना है।

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