Red Sea Facts: जब पानी नीला है तो इसे ‘लाल सागर’ क्यों कहा जाता है? जानिए इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण

दुनिया भर में कई रहस्यमयी और ख़ास जगहें हैं, जिनमें से एक है ‘लाल सागर’ (Red Sea)। ताज़ा Red Sea Facts (रेड सी फ़ैक्ट्स) के अनुसार, अफ़्रीका और एशिया के बीच स्थित इस अहम सागर का नाम सुनते ही ज़ेहन में लाल रंग के पानी की तस्वीर उभरती है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि अन्य सागरों की तरह इसका पानी भी मुख्य रूप से नीला ही है। ऐसे में यह सवाल लाज़िमी है कि आख़िर इसे ‘लाल सागर’ क्यों कहा जाता है? न्यूज़ रिपोर्ट्स और वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक़, इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और सख़्त वैज्ञानिक कारण छिपा है।
Red Sea Facts: क्या है लाल रंग का वैज्ञानिक (Scientific) कारण?
वैज्ञानिकों के अनुसार, लाल सागर के पानी के लाल या भूरे रंग का दिखाई देने के पीछे एक विशेष प्रकार का सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) ज़िम्मेदार है। इस नीले-हरे शैवाल को ‘ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम’ (Trichodesmium erythraeum) कहा जाता है। जब मौसम में बदलाव होता है, तो समुद्र की सतह पर यह शैवाल तेज़ी से पनपने लगता है। इसके खिलने (Algal Bloom) की प्रक्रिया के दौरान यह सागर के साफ़ नीले पानी को कुछ वक़्त के लिए लाल या भूरे रंग में बदल देता है।
दिशाओं को रंगों से पहचानने की प्राचीन परंपरा
वैज्ञानिक कारण के अलावा, इतिहासकार इसका एक और अहम् भौगोलिक कारण बताते हैं। प्राचीन काल में एशियाई भाषाओं में दिशाओं को दर्शाने के लिए अक्सर रंगों का इस्तेमाल किया जाता था। इस सख़्त नियम के तहत लाल रंग ‘दक्षिण’ दिशा को और काला रंग ‘उत्तर’ दिशा को दर्शाता था। चूंकि लाल सागर दक्षिण दिशा में स्थित है, इसलिए प्राचीन लोगों ने इसे यह ख़ास नाम दिया। (ठीक इसी तरह उत्तर में स्थित सागर को ‘काला सागर’ कहा जाता है)।
वैश्विक व्यापार (Global Trade) का सबसे अहम रास्ता
यह सागर न केवल अपने नाम के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद ज़रूरी है। यह स्वेज़ नहर (Suez Canal) के ज़रिए भूमध्य सागर को जोड़ता है और दुनिया भर के व्यापार का क़रीब 12 प्रतिशत हिस्सा इसी अहम रास्ते से गुज़रता है।


