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रायपुर सर्राफा बाजार का कामकाज ठप, 2500 बंगाली कारीगर गए वोट डालने

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मी का असर अब दूसरे राज्यों के व्यापार पर भी देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सबसे प्रमुख और व्यस्त Raipur Bullion Market (रायपुर सर्राफा बाजार) इन दिनों कारीगरों की भारी कमी का सामना कर रहा है। दरअसल, यहां सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाले 2500 से अधिक बंगाली कारीगर अपने गृह राज्य (पश्चिम बंगाल) में वोट डालने के लिए लौट गए हैं।

राजनीतिक पार्टियों ने भेजी बस और ट्रेन की टिकटें

कारीगरों के भारी संख्या में लौटने के पीछे एक बड़ी वजह राजनीतिक दलों की सक्रियता भी है। मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए रायपुर में काम कर रहे इन कारीगरों के लिए ट्रेन और बस की टिकटें खुद बुक कराकर भेजी हैं। मुफ्त यात्रा की सुविधा और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के उत्साह में ये कारीगर अपने घरों की ओर कूच कर गए हैं।

सर्राफा बाजार का कामकाज हुआ बुरी तरह प्रभावित

रायपुर का सर्राफा बाजार आभूषणों की बारीक नक्काशी और गढ़ाई (डिजाइनिंग) के लिए मुख्य रूप से इन बंगाली कारीगरों पर ही निर्भर है।

अचानक 2500 से अधिक कारीगरों के चले जाने से बाजार में स्थिति चिंताजनक हो गई है:

  • ऑर्डर पेंडिंग: आभूषणों के निर्माण का काम पूरी तरह से ठप हो गया है और ग्राहकों के पुराने ऑर्डर भी पेंडिंग (लंबित) हो गए हैं।
  • व्यापारियों की चिंता: सर्राफा व्यापारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब तक चुनाव खत्म नहीं हो जाते और कारीगर वापस नहीं लौटते, तब तक बाजार की रौनक और कामकाज प्रभावित रहेगा।

“बंगाल में परिवर्तन की लहर है” – कारीगर

रायपुर सदर बाजार में सोने के व्यवसाय से जुड़े इन कारीगरों का स्पष्ट कहना है कि वे हर हाल में अपना वोट डालने जरूर जाएंगे। उनका दावा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में ‘परिवर्तन की लहर’ देखने को मिल रही है, और वे इस महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनने से चूकना नहीं चाहते।

चुनाव चाहे जिस राज्य में हो, उसका आर्थिक असर पूरे देश के व्यापारिक चक्र पर पड़ता है और Raipur Bullion Market की मौजूदा स्थिति इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।

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