स्टांप ड्यूटी घटाने का फैसला कागज़ों में ही सिमटा, जिले तक नहीं पहुँचा आदेश
It remained confined, the order did not reach the district

बैंक गारंटी न बन पाने से धान उठाव ठप, राइस मिलर परेशान।
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा राइस मिलरों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से बैंक गारंटी पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी को 0.25 प्रतिशत से घटाकर 0.05 प्रतिशत किए जाने का फैसला लिया गया था, लेकिन यह फैसला अब तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद अब तक संबंधित आदेश जिला कार्यालयों तक नहीं पहुँच सका है, जिसके कारण राइस मिलर गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं।
बैंक गारंटी नहीं बन पा रही
कस्टम मिलिंग सिस्टम के तहत धान उठाव और परिवहन के लिए राइस मिलरों को बैंक गारंटी अनिवार्य रूप से जमा करनी होती है। लेकिन स्टांप ड्यूटी में कटौती का आदेश न मिलने से बैंक अभी भी पुरानी दर (0.25%) पर ही स्टांप शुल्क मांग रहे हैं।
इस स्थिति में कई मिलर बैंक गारंटी नहीं बनवा पा रहे हैं, जिससे धान का उठाव प्रभावित हो रहा है।
धान खरीद और मिलिंग पर असर
बैंक गारंटी न बनने के कारण मिलरों द्वारा धान उठाव शुरू नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर धान खरीद, भंडारण और मिलिंग प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
मिलरों का कहना है कि अगर जल्द आदेश लागू नहीं हुआ तो पूरी खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मिलरों में नाराज़गी
राइस मिलर संघों ने सरकार से मांग की है कि
• स्टांप ड्यूटी कटौती का तत्काल लिखित आदेश जारी किया जाए,
• जिला और बैंक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश भेजे जाएँ,
• ताकि समय रहते बैंक गारंटी बन सके और धान उठाव सुचारु रूप से शुरू हो।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले में अभी तक जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। मिलरों का कहना है कि कैबिनेट का फैसला तभी सार्थक होगा जब वह ज़मीन पर लागू होगा


