भारतीय परिवारों का सोने से प्रेम: घरों में छिपा है 25,000 टन सोना, अमेरिका-चीन और दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के रिजर्व से भी ज्यादा

भारत में सोने (Gold) का क्रेज सिर्फ आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वित्तीय सुरक्षा और परंपरा का भी एक बहुत बड़ा प्रतीक है। एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। मनीकंट्रोल (Moneycontrol) और अन्य आर्थिक रिपोर्टों के अनुसार, Indian Household Gold Holdings (भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना) का कुल आंकड़ा लगभग 25,000 से 30,000 टन के पार पहुंच गया है।
यह कोई छोटी बात नहीं है; यह विशाल खजाना दुनिया के टॉप 10 देशों के केंद्रीय बैंकों के कुल स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) से भी कहीं ज्यादा है।
भारतीय परिवारों के पास 445 लाख करोड़ का ‘तिजोरी वाला सोना’
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज और अन्य रिसर्च एजेंसियों के अनुमानों के मुताबिक, भारतीय घरों की तिजोरियों में रखे इस सोने की कुल कीमत लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 445 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है।
इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में इस तरह समझा जा सकता है:
- यह सोना देश की नॉमिनल जीडीपी (लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर) से भी अधिक मूल्यवान है।
- परिवारों की कुल गैर-प्रॉपर्टी संपत्ति में 65% हिस्सा सिर्फ सोने का है।
- यह बैंक जमा और इक्विटी (शेयरों) के संयुक्त मूल्य से लगभग 175% अधिक है।
टॉप 10 देशों के सेंट्रल बैंक भी भारत के परिवारों से पीछे
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश और उनके केंद्रीय बैंक भी भारतीय घरों में रखे सोने की तुलना में काफी पीछे हैं।
आइए एक नजर डालते हैं टॉप देशों के आधिकारिक स्वर्ण भंडार पर:
- अमेरिका: लगभग 8,133 टन
- जर्मनी: लगभग 3,350 टन
- इटली और फ्रांस: लगभग 2,400 टन (प्रत्येक)
- रूस: लगभग 2,330 टन
- चीन: लगभग 2,299 टन
- भारत (RBI): लगभग 880 टन (आधिकारिक भंडार)
इन सभी टॉप 10 देशों के आधिकारिक सोने को यदि मिला भी दिया जाए, तो भी यह भारतीय परिवारों के 25,000 टन के निजी सोने के भंडार की बराबरी नहीं कर सकता।
भारत में सोना क्यों है सबसे बड़ा ‘सेफ्टी नेट’?
भारत में सोने को सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में काम आने वाला सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है। चाहे शादी-ब्याह का अवसर हो, त्यौहारी सीजन हो, या फिर अचानक आया कोई बड़ा आर्थिक संकट; सोना हमेशा एक ‘गोल्डन सेफ्टी नेट’ (Golden Safety Net) के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, संकट के समय लोग अक्सर इसे बेचने के बजाय इस पर गोल्ड लोन (Gold Loan) लेना ज्यादा पसंद करते हैं।
लगातार बढ़ती कीमतों के कारण महज पिछले पांच सालों में भारतीय परिवारों के इस सोने की वैल्यू में चार गुना से अधिक का उछाल आया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि Indian Household Gold Holdings ही असल मायने में भारत की आर्थिक रीढ़ और सबसे बड़ा खजाना है।



