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Dhamtari Tribal Protest: 45 गांवों के हजारों आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से भारी टकराव

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को एक बड़ा Dhamtari Tribal Protest (धमतरी आदिवासी प्रदर्शन) देखने को मिला। वनांचल क्षेत्र के 45 गांवों के हजारों आदिवासियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पुल-पुलिया जैसी 7 प्रमुख बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति धमतरी-गरियाबंद के बैनर तले आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि उनके गांवों के हालात नरक से भी बदतर हैं और वे केवल भगवान भरोसे अपना जीवन काट रहे हैं।

Dhamtari Tribal Protest: 10 किलोमीटर का पैदल मार्च और पुलिस की सख्त नाकेबंदी

इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे नगरी ब्लॉक से हुई। दोपहर 12:30 बजे तक हजारों की संख्या में ग्रामीण शांति घाट पहुंचे और वहां से शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए करीब 10 किलोमीटर का पैदल मार्च किया। प्रशासन ने इस Dhamtari Tribal Protest को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे।

आवाजाही को बाधित करने के लिए नगरी और उसके आसपास के पेट्रोल पंपों को दोपहर 1 बजे तक बंद करवा दिया गया और डीजल देने पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के कदम नहीं रुके। बनरौद के पास पुलिस-प्रशासन ने सड़क के बीचों-बीच ट्रक खड़े कर दिए और भारी बैरिकेडिंग कर दी।

आंसू गैस के गोले भी नहीं रोक पाए ग्रामीणों के कदम

कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए रायपुर रेंज से 350 से ज्यादा पुलिस जवानों का बल बुलाया गया था। जब बैरिकेड्स के पास ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। हालांकि, पुलिस का यह प्रयास पूरी तरह नाकाम रहा और आदिवासी कलेक्ट्रेट तक पहुंचने में सफल रहे। रास्ते भर प्रदर्शनकारी अपने हाथों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लेकर नारेबाजी करते रहे।

एक महीने का राशन-पानी लेकर पहुंचे थे ग्रामीण

इस प्रदर्शन में शामिल 40 से अधिक गांवों के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर बेहद मुखर थे। उनका कहना था कि वे अपने साथ एक महीने का राशन-पानी लेकर आए हैं और जब तक उनकी सुनवाई नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

ग्रामीणों ने बताया कि वे कई पीढ़ियों से विकास की राह देख रहे हैं, लेकिन आज तक कोई कार्य नहीं हुआ है। वहां न स्कूल है, न अस्पताल और न ही आवागमन के लिए पक्की सड़क।

  • महिलाओं और बच्चों की परेशानी: प्रदर्शन में आई महिलाओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि अस्पताल न होने के कारण डिलीवरी के समय सही इलाज नहीं मिल पाता, जिससे कई बार मां और बच्चे की जान चली जाती है।
  • स्कूली शिक्षा प्रभावित: सड़क न होने के कारण छोटे बच्चों को हर दिन कीचड़ भरे रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है।

Dhamtari Tribal Protest का कारण: टाइगर रिजर्व के नियम

ग्रामीणों के अनुसार, उनके गांवों में विकास कार्यों के न होने का सबसे बड़ा कारण वन विभाग है। यह पूरा क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जिसका गठन साल 2009 में हुआ था। ग्रामीणों का तर्क है कि उनके पूर्वज टाइगर रिजर्व बनने से कई पीढ़ियों पहले से इन जंगलों में निवास कर रहे हैं। वन विभाग के कड़े नियमों के कारण वहां बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसे आदिवासी अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं।

कलेक्टर ने दिया मांगों पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन

भारी विरोध के बाद प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने धमतरी के कलेक्टर अविनाश मिश्रा को अपना ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि संबंधित क्षेत्र टाइगर रिजर्व के दायरे में आता है, जिसके कारण विकास कार्यों के लिए अलग नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।

उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया:

  • मुख्यमंत्री की ओर से पुल निर्माण के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
  • कुछ सड़कों के निर्माण के लिए विभागीय स्वीकृति लेने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

प्रशासन से मिले इस ठोस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और अपने-अपने गांवों की ओर वापस लौटे।

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