Chhattisgarh Political Appointments: निगम-मंडलों में 300 पद खाली, ढाई साल बाद भी BJP कार्यकर्ताओं के हाथ निराशा

(Lead Paragraph) छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को सत्ता में आए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं। लेकिन, अब तक प्रदेश के विभिन्न निगमों, मंडलों, आयोगों और प्राधिकरणों में तीन सौ से अधिक पद खाली पड़े हैं। Chhattisgarh Political Appointments (राजनीतिक नियुक्तियों) में हो रही इस अत्यधिक देरी ने अब पार्टी के भीतर ही असंतोष को जन्म दे दिया है। सालों से संगठन के लिए पसीना बहाने वाले सैकड़ों कार्यकर्ता अब जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद छोड़ते जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इसका सीधा असर 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर देखने को मिल सकता है।
Chhattisgarh Political Appointments में देरी से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश
दिसंबर 2023 में जब भाजपा ने सत्ता में वापसी की थी, तब यह संकेत दिए गए थे कि कार्यकर्ताओं को जल्द ही निगम और मंडलों में समायोजित किया जाएगा। शुरुआती दौर में चंद निगम-मंडलों में अध्यक्षों की ताजपोशी जरूर हुई, लेकिन उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद आज भी खाली हैं।
लगातार हो रही इस देरी से संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध टूटने लगा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में यह संदेश जा रहा है कि उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं है। कई कार्यकर्ताओं का दबी जुबान में यहां तक आरोप है कि सत्ता के करीब रहने वाले गिने-चुने लोगों को ही तवज्जो दी जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग उपेक्षित हैं। संगठन को सक्रिय रखने और कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने के लिए पदों का वितरण एक अहम जरिया होता है, जो फिलहाल ठप है।
किन प्रमुख संस्थाओं में खाली हैं पद?
प्रदेश में कई अहम अकादमियों, शोधपीठों और बोडरें में कामकाज प्रभावित हो रहा है। जिन प्रमुख संस्थाओं में नियुक्तियां लंबित हैं, उनमें शामिल हैं:
- रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) और अरपा विकास प्राधिकरण
- क्रेडा (CREDA) और सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन
- बीज विकास निगम और कृषक कल्याण परिषद
- गौ सेवा आयोग और जीव-जंतु कल्याण बोर्ड
- श्रम कल्याण मंडल और भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल
- राज्य वित्त आयोग और लोक सेवा आयोग (PSC)
- पर्यटन मंडल, हाउसिंग बोर्ड और माटी कला बोर्ड
- दीनदयाल, कबीर और पंडित सुंदरलाल शर्मा शोधपीठ
नियुक्तियों की फाइल आखिर कहां अटकी है?
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और सत्ता के करीबियों के अनुसार, सरकार और संगठन की ओर से इन Chhattisgarh Political Appointments में हो रही देरी के पीछे कई जटिल समीकरण हैं:
- सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन: पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और महिलाओं को आबादी के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व देना एक बड़ी चुनौती है।
- दावेदारों की लंबी फेहरिस्त: एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है। एक-एक पद के लिए दर्जनों दावेदार कतार में हैं, जिससे अंतिम नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।
- वरिष्ठ नेताओं का समायोजन: पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके दिग्गज नेताओं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय चेहरों के बीच संतुलन बिठाना भी मुश्किल हो रहा है।
2028 के चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल की जरूरत
सरकार के कार्यकाल का आधे से ज्यादा समय निकल चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर अब नियुक्तियां होती भी हैं, तो नए पदाधिकारियों को अपने विभाग को समझने और काम करने के लिए बमुश्किल एक या डेढ़ साल का समय ही मिलेगा।
साल 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरी सरकारी और सांगठनिक मशीनरी चुनावी मोड में आ जाएगी। ऐसे में कार्यकाल के अंत में दी गई जिम्मेदारियों का वह असर नहीं दिखेगा, जो शुरुआत में पद मिलने पर होता है। अगर सरकार जल्द नियुक्तियों की सूची जारी कर कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी को दूर नहीं करती है, तो आगामी चुनावों में विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल जाएगा।






