Chhattisgarh DGP Appointment: छत्तीसगढ़ को जल्द मिलेगा स्थायी DGP, अरुण देव गौतम रेस में सबसे आगे

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) पुलिस महकमे से जुड़ी एक बेहद ताज़ा और अहम न्यूज़ सामने आई है। ताज़ा Chhattisgarh DGP Appointment (छत्तीसगढ़ डीजीपी अपॉइंटमेंट) राज्य सरकार जल्द ही प्रदेश के लिए एक स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का आदेश जारी कर सकती है। आधिकारिक न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सख़्त नोटिस की मियाद ख़त्म होने के बाद अब सरकार तेज़ी से यह बड़ा फ़ैसला लेने जा रही है। इस ख़ास दौड़ में वर्तमान प्रभारी डीजीपी अरुण देव गौतम का नाम सबसे आगे है।
UPSC और सुप्रीम कोर्ट का सख़्त रुख़
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ डीजीपी की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। इसी नियम के तहत, यूपीएससी ने राज्य सरकार को एक सख़्त नोटिस भेजकर जवाब मांगा था कि अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। 5 फरवरी 2026 को हुई एक अहम सुनवाई में अदालत ने साफ़ ज़ोर देकर कहा था कि नियुक्ति में ज़्यादा देरी होने पर ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाए जाएंगे।
रेस में अरुण देव गौतम (Arun Dev Gautam) सबसे आगे
पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद जनवरी 2025 में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को डीजीपी का प्रभार सौंपा गया था। यूपीएससी ने 13 मई 2025 को राज्य सरकार के पास दो वरिष्ठ अधिकारियों—अरुण देव गौतम और 1994 बैच के हिमांशु गुप्ता का नाम भेजा था। बाज़ार और प्रशासनिक हलकों में रोज़ हो रही चर्चाओं के मुताबिक़, अरुण देव गौतम की शानदार सर्विस और अनुभव को देखते हुए उनका नाम इस पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है।
30 साल की सर्विस है बेहद ज़रूरी
सुप्रीम कोर्ट के 2006 के ऐतिहासिक फ़ैसले के अनुसार, डीजीपी पद के लिए आमतौर पर 30 साल की पुलिस सर्विस पूरी होना सख़्ती से अनिवार्य है। इसके अलावा, चयनित अधिकारी को कम से कम 2 साल का तय कार्यकाल भी पूरा करना होता है। राज्य सरकार का यह नया और तेज़ क़दम छत्तीसगढ़ की क़ानून व्यवस्था को और भी ज़्यादा सख़्त और मज़बूत बनाने में एक बहुत ही अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की नज़रें इस अंतिम फ़ैसले पर टिकी हैं।



