Chhattisgarh High Court on RTE: आरटीई एडमिशन में देरी पर हाईकोर्ट सख़्त, राज्य सरकार से मांगा शपथ पत्र

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत ग़रीब बच्चों के एडमिशन को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। Chhattisgarh High Court on RTE (छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ऑन आरटीई) हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में आरटीई एडमिशन में हो रही भारी देरी पर सख़्त नाराज़गी ज़ाहिर की है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अदालत ने राज्य सरकार को इस संवेदनशील मामले में अपना साफ़ और आधिकारिक शपथ पत्र (Affidavit) पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है।
Chhattisgarh High Court on RTE: बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ पर सख़्ती
ग़ौरतलब है कि प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति (Reimbursement) राशि न बढ़ाए जाने के विरोध में इस साल आरटीई के तहत एडमिशन देने से साफ़ इंकार कर दिया है। इस सख़्त फ़ैसले के कारण राज्य भर के हज़ारों ग़रीब और वंचित बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सख़्त सवाल उठाए हैं और पूछा है कि बच्चों को समय पर एडमिशन दिलाने के लिए क्या ज़मीनी क़दम उठाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार (State Govt) को जवाब देने का सख़्त अल्टीमेटम
चीफ़ जस्टिस की बेंच ने सुनवाई के दौरान सरकार को सख़्त निर्देश दिया है कि वह अदालत को गुमराह करने के बजाय एक हलफ़नामे के ज़रिए अपनी पूरी और सटीक जानकारी पेश करे। अदालत ने साफ़ कर दिया है कि शिक्षा जैसे बुनियादी अधिकार के मामले में किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
6861 स्कूलों में एडमिशन को लेकर फंसा है पेच
इस साल राज्य के 6861 प्राइवेट स्कूलों की क़रीब 21 हज़ार सीटों पर 38 हज़ार से ज़्यादा आवेदन जमा हुए हैं। प्राइवेट स्कूलों की सख़्त हड़ताल और सरकार की लेटलतीफ़ी के कारण यह पूरी प्रक्रिया बुरी तरह से अधर में लटकी हुई है। अब सबकी नज़रें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं।



