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EVM हैकिंग का खुलेगा राज? बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी EVM चेक करने की इजाजत, जानिए किन पार्ट्स की होगी जांच

देश की सियासत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की हैकिंग (EVM Hacking) और उससे छेड़छाड़ का मुद्दा हमेशा से गरम रहा है। विपक्ष पिछले कई सालों से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाता रहा है। इसी बीच, विधानसभा चुनावों के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कांग्रेस नेता नसीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव के बाद EVM को चेक करने का बड़ा आदेश दिया है।

यह भारतीय चुनावी इतिहास में पहली बार हो रहा है कि चुनाव संपन्न होने के बाद आधिकारिक तौर पर EVM मशीनों का ‘डायग्नोस्टिक चेक’ (Diagnostic Check) किया जाएगा।

कब और कैसे होगी EVM की जांच?

हाईकोर्ट के आदेशानुसार, 16 और 17 अप्रैल को मुंबई में ईवीएम मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी।

इस जांच प्रक्रिया से जुड़ी कुछ अहम बातें इस प्रकार हैं:

  • जांच कौन करेगा? EVM का इंस्पेक्शन (निरीक्षण) मशीन बनाने वाली कंपनी ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (BEL) के इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा।
  • कौन-कौन रहेगा मौजूद? जांच के दौरान कांग्रेस नेता नसीम खान, उनके द्वारा लाया गया एक तकनीकी विशेषज्ञ (Expert) और चुनाव अधिकारी (Election Officer) मौके पर मौजूद रहेंगे।
  • कितनी मशीनों की होगी जांच? याचिकाकर्ता के विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल हुईं कुल मशीनों में से 5 प्रतिशत (लगभग 20 मशीनों) को इंस्पेक्ट करने की इजाजत दी गई है।

जांच के दौरान BEL के इंजीनियर मशीन के ‘माइक्रोकंट्रोलर’ का तकनीकी ऑडिट करेंगे। इस दौरान यह बारीकी से देखा जाएगा कि मशीन के सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में कोई अनधिकृत बदलाव (Unauthorized Modification) तो नहीं किया गया था।

Diagnostic Check में किन पार्ट्स की होगी जांच?

ईवीएम चेकिंग के दौरान मशीन के मुख्य और सबसे संवेदनशील हिस्सों की गहराई से जांच की जाएगी, जिनमें शामिल हैं:

  1. कंट्रोल यूनिट (Control Unit): यह मशीन का ‘दिमाग’ होता है। यही यूनिट पूरा पोलिंग डेटा स्टोर करती है और पूरी वोटिंग प्रक्रिया इसी से कंट्रोल होती है। टोटल वोट और रिजल्ट इसी में सुरक्षित रहते हैं।
  2. बैलट यूनिट (Ballot Unit): यह वह डिवाइस है जिस पर कैंडिडेट के नाम और चुनाव चिह्न होते हैं और वोटर अपना बटन दबाता है।
  3. VVPAT (वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल): यह वह मशीन है जो वोट पड़ने के बाद वेरिफिकेशन के लिए एक पेपर स्लिप प्रिंट करती है।
  4. बर्न्ट मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर: याचिकाकर्ता को मशीन की मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर को चेक और वेरिफाई करने की विशेष अनुमति मिली है।

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला EVM Hacking के दावों और शंकाओं को लेकर दूध का दूध और पानी का पानी करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें 16 और 17 अप्रैल को होने वाली इस ऐतिहासिक जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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