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तेज-तर्रार नेत्रियों में एक थी सुषमा स्वराज, यादों में रहेंगी सदा

नई दिल्ली/जनदखल. भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 67 वर्ष की थीं। उनके परिवार में पति स्वराज कौशल और एक पुत्री बांसुरी स्वराज हैं। सुषमा स्वराज को उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें तुरंत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर ले कर बचाने का प्रयास किया लेकिन उनके शरीर ने साथ नहीं दिया।

बीजेपी की कद्दावर नेता रहीं सुषमा की शालीनता, सक्रियता और भाषण शैली उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती थी। सुषमा स्वराज का नाता सिर्फ एक राज्य से नहीं रहा, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से भी रहा। यूं कहा जाए कि अपने राजनीतिक करियर यूपी, दिल्ली समेत करीब 6 राज्यों की राजनीति में सक्रिय रहीं। बता दें कि सुषमा स्वराज के निधन पर राष्ट्रपति कोविंद, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। तेजस्वी, शक्तिशाली, अथक भावना से परिपूर्ण पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एक ऐसी नेता थीं जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल में बतौर नेता कई भूमिकाएं निभाईं। उन्हें भले ही सबसे अधिक याद विदेश में मुसीबत में फंसे भारतीयों तक पहुंचने में सक्रिय होने के साथ विदेश मंत्री की भूमिका को नई उंचाई तक ले जाने के लिए किया जाएगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में उनका संक्षिप्त कार्यकाल भी काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं। इसके साथ ही यह भी काफी महत्वपूर्ण रहा कि 1977 में वह 25 साल की उम्र में हरियाणा कैबिनेट की मंत्री बनने वाली सबसे युवा नेता थीं। भारतीय जनता पार्टी में उनका उदय एल. के. आडवाणी की करीबी होने की वजह से हुआ। वह आडवाणी के उन चार सहायकों में से एक थीं, जिन्हें डी4 के तौर पर जाना जाता था। दिल्ली के इन चार शक्तिशाली नेताओं – सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अनंत कुमार और एम. वेंकैया नायडू का उस समय पार्टी में काफी दबदबा था।

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