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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मॉब लिंचिंग को रोकने राज्य सरकारें क्या कर रही हैं

नई दिल्ली/जनदखल. सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग को लेकर लगाई गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार और दस राज्यों से पूछा है कि उन्होंने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकारों ने ऐसी भीड़ हिंसा को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी 10 सूत्रीय निर्देश का पालन नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मॉल लिंचिंग के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे रोकने के लिए कुछ कदम बताए थे। इनमें से एक कदम कोर्ट ने ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कड़ाई से कानून का पालन करना बताया गया था, जो कानून के सिद्धांत और देश के सामाजिक तानेबाने के लिए खतरा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली एक बेंच ने केन्द्र, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान समेत 10 राज्यों को याचिका पर कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी किया गया।

पिछले दिनों अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन समेत सहित कई हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर भारत में बढ़ रहे लिंचिंग के मामलों पर चिंता व्यक्त की है। विभिन्न पृष्ठभूमि की 49 हस्तियों ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक साथ 23 जुलाई को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के जरिए यह मुद्दा उठाया। पत्र पर श्याम बेनेगल, रिद्धि सेन, रामचंद्र गुहा, बिनायक सेन, सौमित्र चटर्जी, रेवती, शुभा मुद्गल, अनुपम रॉय शामिल आदि के साक्षात्कार किए गए हैं। पत्र में शुरुआत में लिखा गया है- प्रिय प्रधानमंत्री, हम शांतिप्रिय और गर्वित भारतीयों के तौर पर अपने प्रिय देश में हाल के दिनों में घटित होने वाली कई दुखद घटनाओं के बारे में काफी चिंतित हैं।

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