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लगातार पंद्रह सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थी शीला दीक्षित

नई दिल्ली/जनदखल. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 81 साल की थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्हें सुबह सीने में जकड़न की शिकायत के बाद फोर्टिस एस्कार्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहीं दीक्षित सबसे ज्यादा 15 वर्ष( 1998-2013) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

शीला दीक्षित को 2014 में केरल का राज्यपाल बनाया गया था। लेकिन 25 अगस्त 2014 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। वह इस साल उत्तर-पूर्व दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं। इस चुनाव में उन्हें भाजपा के मनोज तिवारी के सामने हार मिली। अपने निधन से कुछ दिनों पहले तक वह राजनीति में सक्रिय थीं और हाल ही में उन्होंने दिल्ली में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति भी की थी। इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी पेश किया था। शीला को हमेशा से गांधी-नेहरू परिवार का करीबी माना जाता था।

31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में जन्मीं शीला दीक्षित 1984 से 1989 तक कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद रही थीं। 1986 से 1989 तक केंद्रीय मंत्री पद भी संभाला। 1998 में कांग्रेस ने शीला दीक्षित को पहली बार दिल्ली का कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी सफलता मिली। उन्होंने पंद्रह वर्ष तक मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली पर शासन किया। लगातार पंद्रह सालों तक सीएम रहने वाली देश की पहली महिला नेता भी बनीं। अपने शासन के दौरान सार्वजनिक परिवहन को सीएनजी आधारित करने, फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर उन्हें याद किया जाता है। शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है। दिल्ली में मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार हो या फिर बारापूला जैसे बड़े रोड नेटवर्क उन्हीं की देन माने जाते हैं।

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