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अयोध्या मंदिर मसला : जब से यह टूटा फूटा विध्वंस था, हम तब भी पूजा करते थे

नई दिल्ली/जनदखल. अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने संविधान पीठ के समझ दलील दी कि जन्मस्थान अयोध्या ही भगवान है। जन्मस्थान को बांट कर भगवान का बंटवारा नहीं किया जा सकता। यहां तक कि देवता की संपत्ति मंदिर को भी नहीं बांट सकते। जन्मस्थान हमेशा भगवान ही बना रहेगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ के समक्ष वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह तो माना था कि अयोध्या राम का जन्मस्थान है लेकिन उसने इस बात को नजरंदाज कर दिया था कि जन्मस्थान का बंटवारा नहीं हो सकता।

जब स्थान ही भगवान है तो उसे भगवान को कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जन्मस्थान और मंदिर के बारे में कब्जे की बात नहीं की जा सकती, न ही टाइटल की बात यहां आती है। सिर्फ इसलिए कि वहां मस्जिद बन गई थी और कुछ लोग नमाज के लिए आने लागे थे इससे जन्मस्थान के भगवान होने की स्थिति पर फर्क नहीं पड़ता। वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिमों का वहां कभी पूर्ण कब्जा नहीं रहा, न ही ऐसा वे कभी सिद्ध कर पाए। जबकि हम यहां तब से हैं जब से यह टूटा फूटा विध्वंस था, हम तब भी पूजा करते थे क्योंकि पूरी अयोध्या ही हमारे लिए पवित्र है।

इस पर जस्टिस गोगोई ने पूछा कि यह कहा गया है कि स्थल पर दोनों का संयुक्त कब्जा था आप इसे कैसे नकारेंगे। वैद्यनाथन ने जवाब दिया कि यह कभी नहीं माना गया कि 16वीं सदी में खाली जमीन पर मस्जिद का निर्माण हुआ। उच्च न्यायालय में जस्टिस खान ने भी माना है कि मस्जिद यहां मंदिर के विध्वंस स्थल पर बनाई गई। हिन्दुओं ने कभी इसे नहीं माना कि उनका जन्म स्थान पर प्रवेश नहीं था। उन्होंने एक सबूत का हवाला दिया जिसमें 1858 में तत्कालीन थानेदार शीतल दुबे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हिंदू यहां सैकड़ों वर्षों से जन्मस्थान की पूजा करते आ रहे हैं। उसी समय एक चबूतरा भी बनाया गया। गोपाल सहाय अमीन द्वारा बनाए गए नक्शे में तीन ढांचों को दिखाया गया है। जस्टिस गोगोई ने पूछा कि 1858 में उस ढांचे को हटाने के आदेश हुए थे, क्या उनका पालन किया गया। वैद्यनाथन ने कहा कि इस आदेश का पालन नहीं हुआ ढांचा बना रहा, पूजा चलती रही और चबूतरा स्थल के अंदरुनी आंगन में बना रहा।

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