बस्तर: खूंखार बटालियन का सरेंडर, IG सुंदरराज पी ने बचे हुए कैडरों को दी सख्त चेतावनी

छत्तीसगढ़ के बस्तर (दंडकारण्य) क्षेत्र में माओवादी गतिविधियां अब पूरी तरह से सिमटती जा रही हैं। सुरक्षा बलों के लगातार और कड़े प्रहार के बाद, नक्सली संगठन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाल ही में खूंखार माओवादी कमांडरों और बटालियन के सदस्यों द्वारा किए गए बड़े आत्मसमर्पण के बाद, पूरा इलाका तेजी से Bastar Naxal Free (बस्तर नक्सल मुक्त) होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बड़े कमांडरों का सरेंडर: खत्म हुई टॉप लीडरशिप
सुरक्षाबलों के ‘एंटी-नक्सल ऑपरेशन’ को बड़ी सफलता तब मिली जब कुख्यात नक्सली कमांडर ‘पापा राव’ और ‘सोढ़ी केसा’ जैसे बड़े नामों ने हथियार डाल दिए। इन बड़े कमांडरों के सरेंडर के बाद बस्तर इलाके में माओवादियों की टॉप लेवल लीडरशिप लगभग शून्य (Zero) हो चुकी है।
अब केवल गिने-चुने माओवादी कैडर ही बचे हैं, जो अलग-अलग जिलों में छोटी-छोटी टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। बड़े माओवादियों के सरेंडर और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद अब केवल 5 हार्डकोर नक्सली ही अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं।
आईजी सुंदरराज पी का 48 से 72 घंटे का सख्त अल्टीमेटम
बस्तर के आईजी (IG) सुंदरराज पी ने बचे हुए नक्सलियों को स्पष्ट और सख्त चेतावनी दी है। आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि:
- बचे हुए नक्सलियों के पास सरेंडर करने के लिए महज 48 से 72 घंटे का समय (अल्टीमेटम) है।
- क्षेत्र में अब गिनती के ही सक्रिय नक्सली बचे हैं, जिनकी पक्की ‘इन्फॉर्मेशन’ पुलिस के पास मौजूद है।
- समय रहते सरेंडर नहीं करने पर एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत कड़ी और अंतिम कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यधारा में लौटने का है आखिरी मौका
आईजी सुंदरराज पी ने स्पष्ट किया है कि लगातार प्रयासों और अपीलों के बावजूद जो कैडर हथियार नहीं डालेंगे, उनका खात्मा तय है। वहीं, जो कैडर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें एक सकारात्मक और शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है।
अब बस्तर एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां से पीछे मुड़कर देखना सिर्फ हिंसा की यादें दिलाता है और आगे का रास्ता पूरी तरह से शांति और विकास की ओर जाता है।



