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Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan: द्रौपदी मुर्मु ने अपने हाथों से परोसा भोजन, लोकनृत्य में झूमे अफसर

देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान राष्ट्रपति भवन में बस्तर की आदिवासी संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। (Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में बस्तर से दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधिमंडल के लिए यह यात्रा एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बन गई। महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने परगना मांझियों, चालकियों और बस्तर पंडुम के जनजातीय कलाकारों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

खबर की मुख्य बातें (Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan)

  • अविस्मरणीय सम्मान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर के अतिथियों को अपने हाथों से भोजन परोसकर जीता दिल।
  • बस्तर की झलक: पहली बार राष्ट्रपति भवन में बस्तर के लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति, अधिकारी भी जमकर झूमे।
  • बदलते बस्तर की तस्वीर: जनजातीय प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति को बताया कि अब बस्तर में भय नहीं, बल्कि शांति और विकास का माहौल है।
  • दिल्ली भ्रमण: इंडिया गेट और कर्तव्य पथ पर बस्तर के युवाओं ने बिखेरा अपनी संस्कृति का जलवा।

आत्मीय मेजबान बनीं राष्ट्रपति, CM साय ने परोसी दाल

प्रतिनिधिमंडल के लिए सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह था, (Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan) जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक आत्मीय मेजबान की भूमिका निभाते हुए सभी अतिथियों को स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधियों को दाल परोसी, जबकि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मिठाई परोसकर अतिथियों का सत्कार किया। राष्ट्रपति भवन में अपनत्व भरे इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया और बस्तर के लोगों ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा अनुभव बताया।

राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का पारंपरिक लोकगीत

इस विशेष अवसर पर बस्तर पंडुम के विजेता कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन परिसर में अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। (Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan) बस्तर की कला के इस अनुपम प्रदर्शन से पूरा राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक रंगत से सराबोर हो उठा। कलाकारों का उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, और पूर्व बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित अन्य अधिकारी भी उनके साथ लोकनृत्य में झूमने लगे।

‘विश्व पटल पर पहचान बनाएगी बस्तर की कला’

राष्ट्रपति से चर्चा के दौरान कांकेर के पद्मश्री से अलंकृत काष्ठ कलाकार अजय मंडावी ने कहा कि बस्तर की कला विश्व में अद्वितीय है। लंबे समय तक भय के कारण यह विरासत बड़े स्तर पर सामने नहीं आ सकी थी, लेकिन अब सुरक्षा बलों और सरकार के प्रयासों से स्थापित शांति के कारण कलाकारों को अपनी प्रतिभा दुनिया के सामने रखने का मंच मिल रहा है।

प्रतिनिधियों ने साझा किए ‘बदलते बस्तर’ के अनुभव

  • दशहरा का आमंत्रण: गढ़िया-लोहंडीगुड़ा परगना के मांझी बलराम कश्यप ने बताया कि अब बस्तर के हालात बदल चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रपति को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण दिया, जिसे राष्ट्रपति ने सहृदय स्वीकार किया।
  • शिक्षा और विकास: बीजापुर के मिरतुर परगना के चालकी भरत कश्यप ने बताया कि अब बच्चे बिना डर के स्कूल जा रहे हैं, सड़कें बन रही हैं और संचार सुविधाएं बढ़ रही हैं।
  • शांति का माहौल: दंतेवाड़ा की गौर नृत्यांगना लक्ष्मी सोढ़ी ने कहा कि जिस बस्तर पंडुम की शुरुआत राष्ट्रपति ने की थी, उसकी विजेता के रूप में यहां पहुंचना गर्व की बात है। आज बस्तर में पारंपरिक मेले और मड़ई पूरे उत्साह से मनाए जा रहे हैं।

दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों पर बिखेरा जलवा, Bastar Delegation Rashtrapati Bhavan

राष्ट्रपति भवन का भ्रमण कर उसकी गौरवशाली विरासत को जानने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और अमर जवान ज्योति का अवलोकन किया। इंडिया गेट के सामने जब इन कलाकारों ने ‘ऐसा जादू है मेरे बस्तर में’ और अन्य हल्बी-गोंडी गीतों पर सुर मिलाए, तो वहां मौजूद लोग भी उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने लगे। पहली बार अपने गांव से निकलकर दिल्ली पहुंचे युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा।

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