TMC Split in Bengal: 58 विधायकों की बगावत के बाद शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे ममता के करीबी, मेयर पद पर असमंजस

TMC Split in Bengal:कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में हर दिन एक नया और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को पार्टी गठन के 28 साल बाद पहली बार इतनी बड़ी बगावत और टूट का सामना करना पड़ा है। बुधवार को टीएमसी के कुल 80 में से 58 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पसंद को दरकिनार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को विधायक दल का नेता चुन लिया। विधानसभा स्पीकर ने भी इस गुट को मान्यता दे दी है। लेकिन इस सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले कई दिग्गज नेता राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) की प्रशासनिक बैठक में पहुंच गए।
दिल्ली की एक मुलाकात और 13 दिन में टूटी पार्टी
टीएमसी के भीतर बगावत की यह चिंगारी अचानक नहीं भड़की।
- बंग भवन में मुलाकात: इस पूरे खेल की शुरुआत 22 मई को दिल्ली के बंग भवन से हुई, जहां टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक कथित ‘संयोगवश’ (Accidental) मुलाकात हुई थी।
- 13 दिन का सियासी बवंडर: इस एक मुलाकात के बाद बंगाल की राजनीति में ऐसा सियासी बवंडर उठा कि महज 13 दिनों के भीतर ही टीएमसी दो फाड़ हो गई। बागी विधायकों ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को पूरी तरह से नकार दिया है।
ममता के करीबी नेताओं ने बढ़ाया सस्पेंस
पार्टी के भीतर जारी इस भयंकर टूट के बीच बुधवार को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक बुलाई थी।
- बैठक में कौन-कौन पहुंचा: इस बैठक में बागी विधायकों के अलावा ममता बनर्जी के सबसे खास और वफादार माने जाने वाले नेता भी पहुंच गए। इनमें कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, पूर्व प्रवक्ता कुणाल घोष, नयना बंद्योपाध्याय और अशोक देब शामिल थे।
- इन नेताओं का सरकार की बैठक में शामिल होना इस बात का संकेत दे रहा है कि टीएमसी के भीतर अभी और भी बड़े फेरबदल हो सकते हैं।
फिरहाद हकीम के इस्तीफे पर भारी असमंजस
बुधवार दिन में यह खबर तेजी से फैली थी कि टीएमसी विधायक फिरहाद हकीम (Firhad Hakim) ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है।
- इस्तीफे का सच: कुणाल घोष ने दावा किया था कि ममता बनर्जी ने हकीम का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि, देर रात तक फिरहाद हकीम ने केएमसी (KMC) चेयरपर्सन माला रॉय को अपना औपचारिक इस्तीफा नहीं सौंपा था।
- क्या बदल गया फैसला: सूत्रों के मुताबिक, सीएम शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता वाली बैठक में शामिल होने के बाद फिरहाद हकीम अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं। बता दें कि हकीम 2018 से कोलकाता के मेयर हैं और आज़ादी के बाद से इस पद पर बैठने वाले पहले मुस्लिम नेता हैं।
फिलहाल बंगाल की सियासत किस करवट बैठेगी, यह पूरी तरह से चुनाव आयोग और बागी विधायकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा।



