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Supreme Court Relief to Vijay Kumar Kela: समझौते के बाद क्रिमिनल केस चलाना अर्थव्यवस्था के लिए घातक, छत्तीसगढ़ के व्यवसायी को बड़ी राहत, CBI की FIR रद्द

नई दिल्ली/रायपुर। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख व्यवसायी विजय कुमार केला (Vijay Kumar Kela) को एक मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) और दाखिल की गई चार्जशीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जब बैंक और कर्जदार के बीच विधिवत समझौता (Compromise/OTS) हो चुका हो, तो उसके बाद भी आपराधिक मुकदमा (Criminal Case) चलाना देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिए घातक हो सकता है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला यूको बैंक (UCO Bank) के एक लोन और फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स (M/s Mohan Traders) से जुड़ा है।

  • लोन की शुरुआत: विजय कुमार केला ने अपनी याचिका में बताया कि इस फर्म को उनके बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला संभालते थे। व्यापार के लिए फर्म ने यूको बैंक से लोन लिया था, जो वर्ष 2009 तक बढ़कर 8 करोड़ रुपए हो गया था।
  • गिरवी रखी संपत्तियां: इस कर्ज की एवज में रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द की संपत्तियां बैंक के पास गिरवी रखी गई थीं। बाद में आर्थिक तंगी के कारण लोन चुकाने में अनियमितता हुई और बैंक ने इस खाते को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया।

समझौता और उसके बाद सीबीआई की एंट्री

  • वन टाइम सेटलमेंट (OTS): मामले के समाधान के लिए वर्ष 2015 में बैंक और केला परिवार के बीच एक विधिवत समझौता (वन टाइम सेटलमेंट) हुआ। इसके तहत कर्ज की शेष राशि को चुका दिया गया और बैंक ने मामले को बंद कर दिया।
  • सीबीआई की एफआईआर: हैरानी की बात यह रही कि समझौता होने के लगभग ढाई साल बाद, बैंक की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने धोखाधड़ी (IPC 420, 471) का मामला दर्ज कर लिया। आरोप लगाया गया कि गिरवी रखी गई संपत्तियों में हेरफेर किया गया था और ऑडिट रिपोर्ट फर्जी थी।
  • निचली अदालत और हाई कोर्ट: सीबीआई ने इस मामले में रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में चार्जशीट पेश कर दी थी। विजय कुमार केला ने इसे रद्द करने के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 5 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट ने चार्जशीट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद विजय कुमार केला ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) की मुहर के साथ लोन खाते का सेटलमेंट हो चुका है, तो उसके बाद धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप में आपराधिक मुकदमा चलाना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में समझौते के बाद भी व्यापारियों को आपराधिक मुकदमों में फंसाना व्यापारिक माहौल और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की पूरी चार्जशीट और एफआईआर को निरस्त कर दिया।

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