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छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब होगा मंत्रोच्चार: शिक्षा बनाम संस्कार पर छिड़ी नई सियासी बहस

नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब Chhattisgarh Schools (छत्तीसगढ़ के स्कूलों) में दिन की शुरुआत राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ ‘मंत्रोच्चार’ से भी की जाएगी। दरअसल, इस नए नियम की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस ने जन्म ले लिया है।

संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की सरकारी पहल

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, इस अहम पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन परंपराओं से गहराई से जोड़ना है। इसके अलावा, सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं भी तैयार कर ली हैं।

तय कार्यक्रम के मुताबिक, आगामी 15 अप्रैल से शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। वहीं, 16 जून को पूरे प्रदेश में धूमधाम से प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा। परिणाम स्वरूप, सरकार को पूरी उम्मीद है कि इन कदमों से बच्चों में नैतिक मूल्यों की समझ और बेहतर होगी। इसी कड़ी में छात्रों के लिए हर महीने महापुरुषों के जीवन पर आधारित व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

विपक्ष का कड़ा प्रहार और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल

हालांकि, सरकार के इस फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता दीपक बैज का कहना है कि वर्तमान में स्कूलों के अंदर शिक्षकों, किताबों और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। उनका सीधा आरोप है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय अपना वैचारिक एजेंडा थोपने का प्रयास कर रही है।

इसके साथ ही, विपक्ष ने ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे किसी भी प्रयोग से पहले बुनियादी ढांचे को मजबूत करना कहीं अधिक जरूरी है।

शिक्षा और परंपरा का सही संतुलन

विपक्ष के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सत्ता पक्ष ने अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। सरकार का तर्क है कि आधुनिक शिक्षा कभी भी सिर्फ किताबों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। अंततः, छात्रों के संपूर्ण मानसिक विकास के लिए उन्हें अपने संस्कारों और जड़ों से जोड़े रखना भी उतना ही आवश्यक है।

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