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भूतेश्वरनाथ में शिवलिंग के दर्शन –पूजन व जलाभिषेक के लिए उमड़ी भीड़

शिव भक्तो ने जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भगवान शिव का पूजन किया

JANDAKHAL…. गरियाबंद से तीन किमी दूर स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव मे महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारो की संख्या मे भोले के भक्तो ने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता भूतेश्वरनाथ धाम मे लगा रहा। जहां शिव भक्तो ने जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भगवान शिव का पूजन किया। इसके पूर्व महाशिवरात्रि को लेकर सप्ताह भर पहले ही भंडारे, पार्किंग, पेयजल, छोटे व्यवसायियो के लिए जगह आंबटन सहित अन्य सारी व्यवस्थाओ को लेकर भूतेश्वरनाथ समिति एवं ग्रामीणो ने बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय कर ली थी। जिसके अनुरूप सारी व्यवस्थाएं संचालित होती रही।

प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर गरियाबंद, छुरा, मैनपुर, देवभोग, फिंगेश्वर, राजिम सहित गरियाबंद से लगे महासमुंद, धमतरी, रायपुर तथा दुर्ग,भिलाई, राजनांदगांव इत्यादि जिलो से लोग भगवान शिव के दर्शन को यहां पहुचे। नगर के दुर्गा मंदिर से लेकर गांधी मैदान, शारदा चैक, तहसील आफिस से होते हुए भूतेश्वरधाम तक लोगो की भीड़ देखने को मिली जिसमे भक्तो को नगर से भूतेश्वरनाथ तक लाने ले जाने के लिए छोटे वाहन की निःशुल्क व्यवस्था वाहन संचालको द्वारा की गई थी साथ ही साथ शिवभक्तो द्वारा जगह जगह ठंडा पानी और शरबत भी दर्शन करने आए लोगो को पिलाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण मे श्रद्धालुओं के लिए रामायण पाठ और धार्मिक कार्यक्रमो का भी आयोजन किया गया था। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस जुटी रही।

विश्व प्रसिद्ध भूतेश्वनाथ शिवलिंग की ख्याति पूरे देश मे होने के चलते हर वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर दर्शनार्थियो की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसे अर्द्धनारीश्वर शिवलिंग भी कहा जाता है। आस्था और श्रद्धा के चलते ही सालभर यहां श्रद्धालु दर्शन को पहुँचते हैं। महाशिवरात्रि पर आस्था का यह अद्भुत दृश्य एक बार फिर यह साबित करता है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो दूरियां मायने नहीं रखतीं।
भूतेश्वरनाथ धाम में उमड़ा यह जनसैलाब, भक्ति और विश्वास की अटूट शक्ति का प्रतीक है। जो कि अब बढ़ते ही जा रहा है।

महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर भूतेश्वरनाथ धाम में पारागांव निवासी डेविड सोम शिवजी का दिव्य रूप धारण कर श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। जटाधारी स्वरूप, त्रिशूल और भस्म से सजे उनके रूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए। बताया जाता है कि डेविड सोम वर्ष 2014 से इसी शिव स्वरूप में श्रद्धालुओं के बीच आते रहे हैं। पहले सावन माह में वे “बोल बम” यात्रा के दौरान भी यही रूप धारण कर भक्ति का संदेश देते थे। उनका कहना है कि यह रूप उनके लिए सिर्फ वेशभूषा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। उन्हें इस रूप में देखकर जहां श्रद्धालु भक्ति में डूब जाते हैं, वहीं श्रद्धालुओं की आस्था और प्रेम को देखकर डेविड भी भावुक और प्रसन्न हो उठते हैं। सच ही है — जब श्रद्धा सच्ची हो, तो हर रूप में शिव के दर्शन हो जाते हैं।

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