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सुषमा के स्नेहिल सृजन”

🙏🏻🌷”सुषमा के स्नेहिल सृजन”…✍️
विधा-मुक्तक
आधार छंद -विधाता
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*सागर*
*नदी बहकर चली आई, मिलन की आस मन में है।*
*सुनहरी रेत पर अक्षर, लिखूँ जो प्यास मन में है।।*
*समुन्दर भी यही कहता, करूँ तेरी प्रतीक्षा नित-*
*तरंगों ने कहा मुझसे, अभी विश्वास मन में है।।*
*लगी ‘सुषमा’ सुहानी है, बही जब धार कल-कल है।*
*नयन में तैरती अब भी, सुहानी धार हलचल है।।*
*प्रिये! तुम बिन अधूरा मन, कहे सागर समर्पण में-*
*प्रवाहित तीव्र वेगों से, सुनाती गीत पल-पल है।।*
…✍️कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल(रायगढ़/रायपुर छ.ग.)
सुप्रभात मधुर वंदन🙏🌷
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